कहानी: एक सोफ़ा, एक सपना, और ऐसे दोस्त जिनका आकार गलत नहीं है
धूल भरे एक रेगिस्तानी कस्बे के किनारे क्लो नाम की एक लड़की अपने छोटे-से कुत्ते स्प्रिंकल्स के साथ रहती है। क्लो को रंग सबसे ज़्यादा पसंद हैं, पर उसके आसपास सब कुछ भूरा है, और कोने में पड़ा पुराना सोफ़ा तो सबसे फीका है।
एक शाम वह आख़िरकार अपने जादुई पेंट मार्करों के ढक्कन खोलती है और सोफ़े को भर देती है: एक मेंढक, कान के पीछे फूल लगाए एक गाय, एक जुगनू, एक उनींदा चाँद, और नकाश नाम का एक छोटा पिल्ला। उसी रात, मेंढक पलक झपकाता है।
रंगे हुए दोस्त क्लो को समुद्र किनारे के उस कस्बे तक ले जाना चाहते हैं जिसका वह सपना देखती है। पर पहले उन्हें एक जैसा आकार बनने की कोशिश छोड़नी होगी, और यह जानना होगा कि उनमें से हर कोई किस काम में अच्छा है।




